*उड़ान*
मंजिले रुख सि गयी है, सासे थंब सि गयी है, पैर फस से गये है, पर मन में है विश्वास, होंगा कुछ खास मिलेंगी मंजिले ,धड़केंगी सास, पैरो मे जान, जब मन ने मन से कर लिया ऐलान की करेंगे मैनत हर दिन हर समान... - तेजस शेळके